खुद को समेट के, खुद में सिमट जाते हैं हम,

Amazing

Summary

खुद को समेट के, खुद में सिमट जाते हैं हम,
एक याद उसकी आती है फिर से बिखर जाते है हम।

khud ko samet ke khud me simat jate hai hum,
ek yaad uski aati hai fir se bikhar jaate hai hum|

खुद को समेट के, खुद में सिमट जाते हैं हम,
एक याद उसकी आती है फिर से बिखर जाते है हम।

khud ko samet ke khud me simat jate hai hum,
ek yaad uski aati hai fir se bikhar jaate hai hum|

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2 Comments

  1. Ajay kumar gupta October 14, 2018
  2. Avinash akela October 26, 2018

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